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शुक्रवार, 18 नवंबर 2016

चलो-चलें चौबारी मेला।

कार्तिक पूर्णिमा के दौरान बरेली में रामगंगा नदी के तट पर लगने वाले चौबारी मेले की कुछ झलकियां।--रोहित उमराव 

गांवों से डल्लब गाड़ी में सवार होकर पूरे साजो सामान के साथ मेला देखने आते ग्रामीण परिवार।


यह मेला विशेषकर घोड़ों की खरीद-बिक्री के लिए जाना जाता है। यहां कई प्रदेशों से घोड़ा व्यापारी अलग-अलग नस्ल के घोड़े लेकर आते हैं। 

मेले में नखासे की शोभा देखते बनती है। यहां घोड़ों के साज-ओ-सामान का बाजार अलग से लगाया जाता है। इसमें घोड़े की काठी, फुलरा, लगाम, घंटियां, नाल, रंग-बिरंगे फुलरे आदि सामान व्यापारी खरीदते हैं।

मेले में अपने लिए छोड़ा घोड़ा लेने पहुंचे अनुभव ने पहने नखासे के देखा।

नखासे से अपनी जरुरत का सामान लेकर जाते लोग।

मेले में इक्के, तांगे, बग्घी, सवारी आदि तरह-तरह के घोड़े बिकते और खरीदे जाते हैं।

मेले में बच्चें के लिए रंग-बिरंगे खिलौने भी बिकते हैं।

मेले में घुड़दौड़ दे्खना अपने आप में सबसे अलग मजे वाली बात है। यहां एक-से-एक शानदार घोड़े अपनी रफ्तार और चाल से लोगों का दिल जीत लेते हैं। आगे दौड़ता नंदगांव के सामवीर का घोड़ा कालू अपनी सरपट चाल से सबसे आगे रहा।

अनुभव ने मेले में कई बार घोड़े को छूने की इच्छा व्यक्त की। उनकी इस ख्वाहिश के लिए मुझे रफियाबाद के रहने वाले वीरेंद्र जी से अग्रह करना पड़ा और इस तरह उन्हें रेश्मा (घोड़ी)  की सवारी करने का मौके मिल।

मेले में डिस्को झूले के नीचे बनी मछली को छूते अनुभव और आराध्या।

मेले में लगा पत्थर से बने सिल-बट्टे, लौढ़ा, चकिया-दरेतिया, होरसा (चकला), खल-मूसल का बाजार।


बुधवार, 16 नवंबर 2016

गांधी उद्यान के तरण ताल में मुशायरे का आयोजन। Post- 4

               पेश  हैं अपनी शायरी से पूरी दुनियां में विख्यात शायर डा. राहत इंदौरी की कुछ दुर्लभ तस्वीरें                                             हिन्दुस्तान के सीनियर फोटोजर्नलिस्ट रोहित उमराव के कैमरे से।                                                                
    फोटो-1
    फोटो-2
    फोटो-3
    फोटो-4
    फोटो-5
    फोटो-6
    फोटो-7
    फोटो-8
    फोटो-9

गांधी उद्यान के तरण ताल में मुशायरे का आयोजन। Post- 3

अपनी शायरी कहती डा. नसीम निकहत।

शायरी का लुत्फ उठाते श्रोता।

अपनी शायरी कहती डा. नसीम निकहत।

मुशायरे में मौजूद शायर प्रो. वसीम बरेलवी।

शायरी सुनते  श्रोता।

अपनी शायरी कहते शायर मन्सूर उस्मानी।


गांधी उद्यान के तरण ताल में मुशायरे का आयोजन। Post- 2

अपनी शायरी कहते इक़बाल अशहर।

अपनी शायरी कहते इक़बाल अशहर।

अपनी शायरी कहते कलीम समर।

अपनी शायरी कहते अकील नोमानी।

अपनी शायरी कहते अकील नोमानी। 

अपनी शायरी कहते जौहर कानपुरी।

अपनी शायरी कहते जौहर कानपुरी।

गांधी उद्यान के तरण ताल में मुशायरे का आयोजन। Post- 1

मौजूद शायर दाहिने से बाएं से दाहिने-- जौहर कानपुरी, अन्य, वसीम बरेलवी, डा. नसीम निकहत, राहत इंदौरी, अकील नोमानी, कलीम समर, इकबाल अशहर।

मंगलवार की शाम बरेली स्थित गांधी उद्यान के तरण ताल में नगर निगम द्वारा मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे का उद्घाटन हाइकोर्ट के पूर्व जस्टिस कलीम उल्लाह ने किया उनके साथ कमिश्नर प्रमांशु यादव रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मेयर डा. आइएस तोमर ने की। इस दौरान शहर के तमाम शायरी को पसंद करने वाले सैकड़ों लोग शुमार रहे।--रोहित उमराव 

अपने शायरी से लोगों को झुमाती शायरा शबीना अदीब।

अपने शायरी से लोगों को झुमाती शायरा शबीना अदीब।

शायरी का लुत्फ उठाते श्रोता।


अपने शायरी से लोगों को झुमाती शायरा शबीना अदीब। बैठे हुए मन्सूर उस्मानी,  जौहर कानपुरी, अन्य, वसीम बरेलवी, डा. नसीम निकहत, राहत इंदौरी, अकील नोमानी, कलीम समर।


बुधवार, 2 नवंबर 2016

Deepawali Post-4

फोटो-1  दीपावली के मौके पर सिविल लाइंस में साल्वेशन आर्मी चर्च के सामने अपने पूरे परिवार के साथ फुलझडियां छुडाते पूरी कालोनी के लोग।

फोटो-2 दीपावली के मौके पर सिविल लाइंस में साल्वेशन आर्मी चर्च के सामने अपने पूरे परिवार के साथ फुलझडियां छुडाते पूरी कालोनी के लोग।

फोटो-3 दीपावली के मौके पर सिविल लाइंस में साल्वेशन आर्मी चर्च के सामने अपने पूरे परिवार के साथ फुलझडियां छुडाते पूरी कालोनी के लोग।

दीपावली के मौके पर कैंट स्थित स्टेट अथार्टी आफ इंडिया के ध्यान चंद्र स्टेडियम को एथलीट्स ने दीप जलाकर रौशन किया।

दीपावली के मौके पर कैंट स्थित स्टेट अथार्टी आफ इंडिया के ध्यान चंद्र स्टेडियम में एडीएम एफआर मनोज कुमार ने अपने परिवार के साथ पहुंचकर पूजन किया और एथलीट्स के साथ खुशियां साझा की।

फोटो-1 दीपावली के मौके पर बरेली शहर रोशनी से नहा गया। शाम होते ही पूरा आसमान आकाशीय पटाखों की गर्जना के साथ रौशन हो उठा।

फोटो-2  दीपावली के मौके पर बरेली शहर रोशनी से नहा गया। शाम होते ही पूरा आसमान आकाशीय पटाखों की गर्जना के साथ रौशन हो उठा।

Deepawali Post-3

30 अक्टूबर 2016 दीपावली के मौके पर पूजन के बाद दीप जलाते अनुभव महाशय।

30 अक्टूबर 2016 को दीपावली के मौके पर पूजन के बाद दीप जलाते अनुभव और आराध्या।

 दीपावली के मौके पर मां बरेली आईं तो उनके साथ दीपावली मनाने का आनंद ही कुछ अलग रहा। मां ने अपनी बहू, पोते-पोती के साथ पूजन किया। उनको खुश देख मुझे अपार संतुष्टि मिली। 

दीपावली के मौके पर मां ने पूजन के बाद दीप जलाए।

दीपावली के मौके पर दीप जलाती सीमा।