शुक्रवार, 12 मई 2017

Working labour on International Labour Day in Bareilly, UP. India.

   

 १ मई  को मज़दूर दिवस होता है,  बरेली में शाहमतगंज चौराहे में बन रहे फ्लाईओवर में काम करता मज़दूर।

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बरेली जिला जेल की जमीं में बन रही बिजली विभाग  की बिल्डिंग में  मज़दूर दिवस के मौके पर काम करता मज़दूर । 

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बरेली जिला जेल की जमीं में बन रहे  बिजली विभाग  के भवन में  मज़दूर दिवस के मौके पर काम
करती महिला। 

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Amaltaash Tree Flowering in Bareilly, UP.


 शोभा अमलताश की ...

अमलताश की शोभा----भले ही गर्मियों में सूर्य देवता लोगों को झुलसा रहे हैं। लोग दिनभर पसीना-पसीना होकर घूम रहे हैं। मगर इसी गरमी के मौसम में शहर में जगह-जगह खिले हुए अमलताश के फूल लोगों की आंखों को तरावट दे रहे हैं। जिसकी छाया और संबल में लोग कुछ देर ठहरने को मजबूर हो जाते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ आलोक खरे का कहना है कि इस समय अमलताश, जकरैंडा, गुलमोहर, करंज, वरुण, चंपा, केसिया जेमेलिका व अन्य, बाटल ब्रश, कनेर, राखिया, इंडियन कोरल ट्री गर्मियों में खिलते हैं। जो अपनी खूबसूरती और खुशबू के लिए जाने जाते हैं। बरेली क्लब के पास अमलताश के फूलों के साथ अठखेलियां करते हुए सेलफी लेती वुडरो की छात्रा खुसबू।-- रिच कैप्शन रोहित उमराव

सोमवार, 28 नवंबर 2016

Skimmer migratory bird in Bareilly.

                                                                 मेहमान परिंदो से गुलजार हुई बरेली की रामगंगा नदी। 

 सात नवम्बर 2016 को सुबह आठ बजे रामगंगा नदी के द्विपीय मुहानों में पहलीबार देखने ली मिला स्कीमर (पन्चीरा ) पंछी।


स्कीमर (पन्चीरा  पंछी ) अपनी कुछ खास आदतों से अन्य पंछियो से अलग दीखता है।  यह अपने भोजन के लिए समुद्र , झील, नदियों में कई सौ मीटर तक  अपनी खुली  चोंच से पानी को चीरते दीखता है।  मछली चोंच में आते ही लेकर उड़ जाता है। कमाल का संतुलन रखकर पानी  की  सतह के ऊपर यह अपने बड़े पंखों से तेज गति से आगे को उड़ता रहता है।  उड़ते समय पीछे साफ़ दिखाई देती है।  यह शिकार के लिए ऐसा करता है। यह दक्षिड़ी एशिया, अफ्रीका और अमेरिका  में पाया जाता है। भारत में यह पूर्वी और पश्चिमी समुद्री  कोस्टल भागों में देखने को मिल जाता है जबकि उत्तर प्रदेश में अभी तक चम्बल, भाखड़ा और राम गंगा नदी बरेली में देखे जाने की रिकॉर्डिंग है।  

रामगंगा नदी के द्वीपीय इलाकों में बर्ड वाचिंग-शूटिंग के दौरान कैमरे के साथ रोहित उमराव। 


शुक्रवार, 18 नवंबर 2016

चलो-चलें चौबारी मेला।

कार्तिक पूर्णिमा के दौरान बरेली में रामगंगा नदी के तट पर लगने वाले चौबारी मेले की कुछ झलकियां।--रोहित उमराव 

गांवों से डल्लब गाड़ी में सवार होकर पूरे साजो सामान के साथ मेला देखने आते ग्रामीण परिवार।


यह मेला विशेषकर घोड़ों की खरीद-बिक्री के लिए जाना जाता है। यहां कई प्रदेशों से घोड़ा व्यापारी अलग-अलग नस्ल के घोड़े लेकर आते हैं। 

मेले में नखासे की शोभा देखते बनती है। यहां घोड़ों के साज-ओ-सामान का बाजार अलग से लगाया जाता है। इसमें घोड़े की काठी, फुलरा, लगाम, घंटियां, नाल, रंग-बिरंगे फुलरे आदि सामान व्यापारी खरीदते हैं।

मेले में अपने लिए छोड़ा घोड़ा लेने पहुंचे अनुभव ने पहने नखासे के देखा।

नखासे से अपनी जरुरत का सामान लेकर जाते लोग।

मेले में इक्के, तांगे, बग्घी, सवारी आदि तरह-तरह के घोड़े बिकते और खरीदे जाते हैं।

मेले में बच्चें के लिए रंग-बिरंगे खिलौने भी बिकते हैं।

मेले में घुड़दौड़ दे्खना अपने आप में सबसे अलग मजे वाली बात है। यहां एक-से-एक शानदार घोड़े अपनी रफ्तार और चाल से लोगों का दिल जीत लेते हैं। आगे दौड़ता नंदगांव के सामवीर का घोड़ा कालू अपनी सरपट चाल से सबसे आगे रहा।

अनुभव ने मेले में कई बार घोड़े को छूने की इच्छा व्यक्त की। उनकी इस ख्वाहिश के लिए मुझे रफियाबाद के रहने वाले वीरेंद्र जी से अग्रह करना पड़ा और इस तरह उन्हें रेश्मा (घोड़ी)  की सवारी करने का मौके मिल।

मेले में डिस्को झूले के नीचे बनी मछली को छूते अनुभव और आराध्या।

मेले में लगा पत्थर से बने सिल-बट्टे, लौढ़ा, चकिया-दरेतिया, होरसा (चकला), खल-मूसल का बाजार।


बुधवार, 16 नवंबर 2016

गांधी उद्यान के तरण ताल में मुशायरे का आयोजन। Post- 4

               पेश  हैं अपनी शायरी से पूरी दुनियां में विख्यात शायर डा. राहत इंदौरी की कुछ दुर्लभ तस्वीरें                                             हिन्दुस्तान के सीनियर फोटोजर्नलिस्ट रोहित उमराव के कैमरे से।                                                                
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गांधी उद्यान के तरण ताल में मुशायरे का आयोजन। Post- 3

अपनी शायरी कहती डा. नसीम निकहत।

शायरी का लुत्फ उठाते श्रोता।

अपनी शायरी कहती डा. नसीम निकहत।

मुशायरे में मौजूद शायर प्रो. वसीम बरेलवी।

शायरी सुनते  श्रोता।

अपनी शायरी कहते शायर मन्सूर उस्मानी।


गांधी उद्यान के तरण ताल में मुशायरे का आयोजन। Post- 2

अपनी शायरी कहते इक़बाल अशहर।

अपनी शायरी कहते इक़बाल अशहर।

अपनी शायरी कहते कलीम समर।

अपनी शायरी कहते अकील नोमानी।

अपनी शायरी कहते अकील नोमानी। 

अपनी शायरी कहते जौहर कानपुरी।

अपनी शायरी कहते जौहर कानपुरी।